
प्यास पर कुछ हाइकु
प्यास जो टूटी
कुछ कर जाने की
जीना बेकार
प्यास थी जब
जिन्दा था, हुआ तृप्त
मृत घोषित !
प्यास से आस
देश के विकास की
कभी ना टूटे !
मैं भी नहा लूँ
मैलापन मिटा लूं
गंगा की प्यास !

निश्चित रूप से, यह रहा हिंदी में:
विश्राम प्राप्त केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के इंस्पेक्टर और जीवन भर के कहानीकार, वीरेश अरोड़ा के रचनात्मक स्थान में आपका स्वागत है। यह ब्लॉग एक कैनवास है जहां अनुभव कल्पना से मिलते हैं, जो आपके लिए प्रेरित "कहानियों", दिल से "कविताओं", भावपूर्ण "ग़ज़लों" और विनोदी "हिकुड" (छोटे, हास्यप्रद छंद) की एक समृद्ध टेपेस्ट्री लेकर आता है।
राष्ट्र की सेवा समर्पण के साथ करने के बाद, वीरेश अब अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और ज्ञान को लिखित शब्दों में लाते हैं। ऐसी कथाओं की अपेक्षा करें जो प्रेरित करती हैं, ऐसे छंद जो गूंजते हैं, और ऐसे विचार जो उत्थान करते हैं। चाहे आप आत्मनिरीक्षण का एक क्षण, प्रेरणा की चिंगारी, या बस एक आनंददायक पाठ चाहते हों, यह ब्लॉग ईमानदारी और जुनून के साथ तैयार किया गया एक विविध संग्रह प्रदान करता है। इस साहित्यिक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें, जहां अनुभव की ताकत अभिव्यक्ति की सुंदरता के साथ सहज रूप से मिश्रित होती है।
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