Wednesday, 21 May 2014

होली पर एक और बाल कविता -

होली का त्यौहार है आया



होली का त्यौहार है आया
रंगों की बाहर है लाया
डालें कच्चा पक्का रंग
सभी खेल रहे है संग
नाचें गाएं धूम मचाये
मिलकर ढोलक चंग बजाये
लेकर रंग रंगीले आया
होली का त्यौहार है आया

राम रहीम बने हमजोली
डालें रंग बनाकर टोली
कोई धर्म हो कोई जाति
सभी बने है संगी-साथी
गले लगे सब लगा गुलाल
दिल में ना अब कोई मलाल
भेदभाव मिटाने आया
होली का त्यौहार है आया



- वीरेश अरोड़ा "वीर"


1 comment:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 03 मार्च 2018 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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