hindi kavitaye
Saturday, 6 June 2015
hindi kavitaye
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कविता
निश्चित रूप से, यह रहा हिंदी में:
विश्राम प्राप्त केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के इंस्पेक्टर और जीवन भर के कहानीकार, वीरेश अरोड़ा के रचनात्मक स्थान में आपका स्वागत है। यह ब्लॉग एक कैनवास है जहां अनुभव कल्पना से मिलते हैं, जो आपके लिए प्रेरित "कहानियों", दिल से "कविताओं", भावपूर्ण "ग़ज़लों" और विनोदी "हिकुड" (छोटे, हास्यप्रद छंद) की एक समृद्ध टेपेस्ट्री लेकर आता है।
राष्ट्र की सेवा समर्पण के साथ करने के बाद, वीरेश अब अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और ज्ञान को लिखित शब्दों में लाते हैं। ऐसी कथाओं की अपेक्षा करें जो प्रेरित करती हैं, ऐसे छंद जो गूंजते हैं, और ऐसे विचार जो उत्थान करते हैं। चाहे आप आत्मनिरीक्षण का एक क्षण, प्रेरणा की चिंगारी, या बस एक आनंददायक पाठ चाहते हों, यह ब्लॉग ईमानदारी और जुनून के साथ तैयार किया गया एक विविध संग्रह प्रदान करता है। इस साहित्यिक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें, जहां अनुभव की ताकत अभिव्यक्ति की सुंदरता के साथ सहज रूप से मिश्रित होती है।
Monday, 2 June 2014
सह गए
सह गए
गम जुदाई का तो
हँसकर सह गए
सामने आये तो
आंसू बह गए
राजेगम दिल में
रखेंगें सोचा था
अश्क आँखों के मगर
सब कह गए
देखकर पहचानने की कोशिशें
उनके दिल की
बात हमसे कह
गए
मुद्द्तों मैंने किया था
इन्तजार
क्यों किया अब
सोचते ही रह
गए
ख्वाब देखे थे
बहुत तन्हाई में
मिट्टी के घर
की तरह सब
ढह गए
-वीरेश अरोड़ा "वीर"
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गीतिका
निश्चित रूप से, यह रहा हिंदी में:
विश्राम प्राप्त केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के इंस्पेक्टर और जीवन भर के कहानीकार, वीरेश अरोड़ा के रचनात्मक स्थान में आपका स्वागत है। यह ब्लॉग एक कैनवास है जहां अनुभव कल्पना से मिलते हैं, जो आपके लिए प्रेरित "कहानियों", दिल से "कविताओं", भावपूर्ण "ग़ज़लों" और विनोदी "हिकुड" (छोटे, हास्यप्रद छंद) की एक समृद्ध टेपेस्ट्री लेकर आता है।
राष्ट्र की सेवा समर्पण के साथ करने के बाद, वीरेश अब अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और ज्ञान को लिखित शब्दों में लाते हैं। ऐसी कथाओं की अपेक्षा करें जो प्रेरित करती हैं, ऐसे छंद जो गूंजते हैं, और ऐसे विचार जो उत्थान करते हैं। चाहे आप आत्मनिरीक्षण का एक क्षण, प्रेरणा की चिंगारी, या बस एक आनंददायक पाठ चाहते हों, यह ब्लॉग ईमानदारी और जुनून के साथ तैयार किया गया एक विविध संग्रह प्रदान करता है। इस साहित्यिक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें, जहां अनुभव की ताकत अभिव्यक्ति की सुंदरता के साथ सहज रूप से मिश्रित होती है।
Sunday, 1 June 2014
आज - कल
आज - कल
पहले की सोच :
गर कुछ कहना होगा मुझको
मैं बस सच ही कह पाऊंगा
गर मुझको कुछ सुनना होगा
मैं सच को ही सह पाऊंगा
गर मैं सच ना कह पाया तो
मैं बस चुप ही रह जाऊंगा
झूठ समय की माँग अगर है
माँग ना पूरी कर पाऊंगा
आज की सोच :
गर सच कहना होगा मुझको
मैं सच सच ना कह पाऊंगा
गर सच सुनना होगा मुझको
मैं सच को ना सह पाऊंगा
जो चाहो मैं कुछ ना बोलूं
तो चुप भी ना रह पाऊंगा
झूठ समय की माँग अगर है
झूठ दनादन कह जाऊंगा
-वीरेश अरोड़ा "वीर"
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कविता
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Saturday, 31 May 2014
प्रार्थना
प्रार्थना
जितनी मंदिर में श्रद्धा हो
उतना मस्जिद का हो आदर
पूजा स्थल है भारत के
हो गुरुद्वारा या गिरजाघर
मंदिर, मस्जिद, गिरजे, गुरुद्वारे
इक मालिक के है घर सारे
मानव जीवन जिसने देकर
हमको भेजा है धरती पर
इक मालिक के बन्दे होकर
आपस में ना हम टकराएं
संकल्प उठा कर आज कहें हम
रहते है हम सब मिलजुल कर
- वीरेश अरोड़ा "वीर"
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कर गए
जान देकर देश को आज़ाद तो वो कर गए
पर लुटेरों के हवाले देश को फिर कर गए
दर्द ही हमको मिलें हैं हर घड़ी हर मोड़ पर
ढूँढने खुशियों को हम इस देश में जिधर गए
रह रहे थे हम सभी मिलकर के भारत देश में
युग कई इस बात को बीते हुए गुजर गए
घूमती है लाश लोगों की हमारे देश में
आत्मा रहती थी जिनमें वो थे इंशा मर गए
देख कर हालत हमारे देश की लगने लगा
जो थे गुनहगारो के दिल में अब वो सारे डर गए
- वीरेश अरोड़ा "वीर"
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Friday, 30 May 2014
अभिलाषा
हर रिश्ते से पहले बेटा
मैं भारत माँ का कहलाऊँ,
है अभिलाषा मेरी इतनी
माँ की सेवा कुछ कर जाऊँ
क्या जात धरम मालूम नहीं
किस प्रान्त का हूँ क्या बतलाऊँ,
मैं भारत माँ का बेटा हूँ
बस हिन्दुस्तानी कहलाऊँ
मैं स्वार्थ भुला दूं अपने सब
परमार्थ के पथ को अपनाऊँ,
हित नहीं राष्ट्र से बढ़कर कुछ
कोशिश कर सबको समझाऊँ
भ्रष्ट नहीं है कोई भारत में
सदाचारी है सब कह पाऊँ
सोने की चिड़िया का वासी
जग में वापस मैं कहलाऊँ
गाँधी जी का अनुयायी बन
उनके पथ पर चलता जाऊँ,
कोशिश कर उनके सपनो को
साकार बना कर दिखलाऊँ
जो अमर शहीद हैं भारत के
उनको न भूल कभी पाऊँ
और रक्षा में भारत माँ की
मरना हो हँस कर मर जाऊँ
- वीरेश कुमार अरोड़ा "वीर"
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राष्ट्र की सेवा समर्पण के साथ करने के बाद, वीरेश अब अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और ज्ञान को लिखित शब्दों में लाते हैं। ऐसी कथाओं की अपेक्षा करें जो प्रेरित करती हैं, ऐसे छंद जो गूंजते हैं, और ऐसे विचार जो उत्थान करते हैं। चाहे आप आत्मनिरीक्षण का एक क्षण, प्रेरणा की चिंगारी, या बस एक आनंददायक पाठ चाहते हों, यह ब्लॉग ईमानदारी और जुनून के साथ तैयार किया गया एक विविध संग्रह प्रदान करता है। इस साहित्यिक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें, जहां अनुभव की ताकत अभिव्यक्ति की सुंदरता के साथ सहज रूप से मिश्रित होती है।
Thursday, 22 May 2014
पछतावा
पछतावा
इन हसीनाओ से बचके तू निकल,
इनसे कुछ नहीं तू पाएगा,
कर रहा है तो प्यार तो फिर सोच ले,
कल तू मेरी ही तरह पछताएगा I
क्योकि
मैंने माँगी थी जो थोड़ी सी खुशी,
गम मेरे महबूब से इतना मिला,
मुद्दतों से सह रहा हूँ मैं जिसे,
दो घडी भी तू नहीं सह पायेगा I
- वीरेश अरोड़ा "वीर"
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क्षणिकाएँ
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राष्ट्र की सेवा समर्पण के साथ करने के बाद, वीरेश अब अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और ज्ञान को लिखित शब्दों में लाते हैं। ऐसी कथाओं की अपेक्षा करें जो प्रेरित करती हैं, ऐसे छंद जो गूंजते हैं, और ऐसे विचार जो उत्थान करते हैं। चाहे आप आत्मनिरीक्षण का एक क्षण, प्रेरणा की चिंगारी, या बस एक आनंददायक पाठ चाहते हों, यह ब्लॉग ईमानदारी और जुनून के साथ तैयार किया गया एक विविध संग्रह प्रदान करता है। इस साहित्यिक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें, जहां अनुभव की ताकत अभिव्यक्ति की सुंदरता के साथ सहज रूप से मिश्रित होती है।
समय की मांग
समय की मांग
पहले की सोच
गर कुछ कहना होगा मुझको
मैं बस सच ही कह पाउँगा
गर मुझको कुछ सुनना होगा
मैं सच को ही सह पाउँगा
गर सच मैं ना कह पाया तो
मैं बस चुप ही रह जाऊंगा
झूठ समय की मांग अगर है
मांग ना पूरी कर पाउँगा
आज की सोच
गर सच कहना होगा मुझको
मैं सच सच ना कह पाउँगा
गर सच सुनना होगा मुझको
मैं सच को ना सह पाउँगा
जो चाहो मैं कुछ ना बोलूं
तो चुप भी ना रह पाउँगा
झूठ समय की मांग "वीर" है
झूठ दनादन कह जाऊंगा
- वीरेश अरोड़ा "वीर"
निश्चित रूप से, यह रहा हिंदी में:
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राष्ट्र की सेवा समर्पण के साथ करने के बाद, वीरेश अब अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और ज्ञान को लिखित शब्दों में लाते हैं। ऐसी कथाओं की अपेक्षा करें जो प्रेरित करती हैं, ऐसे छंद जो गूंजते हैं, और ऐसे विचार जो उत्थान करते हैं। चाहे आप आत्मनिरीक्षण का एक क्षण, प्रेरणा की चिंगारी, या बस एक आनंददायक पाठ चाहते हों, यह ब्लॉग ईमानदारी और जुनून के साथ तैयार किया गया एक विविध संग्रह प्रदान करता है। इस साहित्यिक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें, जहां अनुभव की ताकत अभिव्यक्ति की सुंदरता के साथ सहज रूप से मिश्रित होती है।
-:::: भारत माँ के बेटों ::::-

-:::: भारत माँ के बेटों ::::-
हे भारत माँ के बेटों भारत माँ की संतानों,
जो है देश की आन बचानी, तो दो तुम कुछ बलिदानी !
रिश्वत खोरी को छोडो, मत घूस से नाता जोड़ो
और भ्रष्टाचार के पथ से, अपना नाता तुम तोड़ो,
अब जग में भारत माँ की, हमको है शान बढ़ानी
जो है देश की आन बचानी.........
जहाँ हरिश्चंद्र ने अपने सच का डंका था बजाया
उस देश में जानो कैसे फिर झूठ ने राज जमाया
आओ मिलकर दफना दें, इस झूठ की दें कुर्बानी
जो है देश की आन बचानी.........
कहीं जात-धरम के झगडे, कहीं ऊंच नीच की बातें
कुछ ऐसा हम कर पाते, मिलकर के सभी रह पाते
हर प्रान्त का रहने वाला, पहले है हिन्दुस्तानी
जो है देश की आन बचानी....
हे भारत माँ के ......
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गीत
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Wednesday, 21 May 2014
-:::: देश की बात ::::--

-:::: देश की बात ::::--
बात बहुत पुरानी है,
सबकी जानी-मानी है
नेता जी के गाँव का दौरा
शीघ्र चुनाव निशानी है.
जो देते है ऊँचें भाषण
प्रलोभन और झूठे आश्वासन
काम यदि वें कुछ कर जाएं
तब होती हैरानी है.
हाथ जोड़कर वोट मांगतें
और गधे को बाप मानते
सत्ता हाथ में आ जाने पर
करते वो मनमानी है.
जब मिलते है यार पुराने (सभा गृह में)
चाहे बीती सबकी जाने
कहते सुनते दिल न भरता
बात करें बचकानी है.
रहते है जब तक साथ में
चलते हैं दे हाथ हाथ में
सिद्ध स्वार्थ के हो जाने पर
कर जाते बेईमानी है.
जाने कैसी मजबूरी है
जाने कैसा नाता है ये,
उनको ही कहना है सब कुछ
जिनसे बात छिपानी है.
जो नेता है भ्रष्टाचारी
उनको सीख सिखानी है
और भ्रष्टाचार मिटाने को अब
हर देशवासी ने ठानी है.
हर नेता को याद दिला दूं
गर मुमकिन हो मैं समझा दूं
भारत माँ के बेटे हम सब
सच्चे हिन्दुस्तानी है…
- वीरेश अरोड़ा "वीर"
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कविता
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राष्ट्र की सेवा समर्पण के साथ करने के बाद, वीरेश अब अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और ज्ञान को लिखित शब्दों में लाते हैं। ऐसी कथाओं की अपेक्षा करें जो प्रेरित करती हैं, ऐसे छंद जो गूंजते हैं, और ऐसे विचार जो उत्थान करते हैं। चाहे आप आत्मनिरीक्षण का एक क्षण, प्रेरणा की चिंगारी, या बस एक आनंददायक पाठ चाहते हों, यह ब्लॉग ईमानदारी और जुनून के साथ तैयार किया गया एक विविध संग्रह प्रदान करता है। इस साहित्यिक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें, जहां अनुभव की ताकत अभिव्यक्ति की सुंदरता के साथ सहज रूप से मिश्रित होती है।
"चंपक वन में होली है"
होली पर एक बाल कविता ... "चंपक वन में होली है"
चंपकवन में होली है
खेल रहे हमजोली है
चूहा डाले बिल्ली पे रंग
लोंमड खेले शेरू के संग
बंदर ने मारी किलकारी
चीकू ले आया पिचकारी
भालू बजा रहा है चंग
हाथी नाचे मस्त मलंग
गीदड़ बना अब ढोली है
चंपक वन में होली है ..
- वीरेश अरोड़ा "वीर"
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बाल कविता
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होली पर एक और बाल कविता -
होली का त्यौहार है आया
रंगों की बाहर है लाया
डालें कच्चा पक्का रंग
सभी खेल रहे है संग
नाचें गाएं धूम मचाये
मिलकर ढोलक चंग बजाये
लेकर रंग रंगीले आया
होली का त्यौहार है आया
राम रहीम बने हमजोली
डालें रंग बनाकर टोली
कोई धर्म हो कोई जाति
सभी बने है संगी-साथी
गले लगे सब लगा गुलाल
दिल में ना अब कोई मलाल
भेदभाव मिटाने आया
होली का त्यौहार है आया
- वीरेश अरोड़ा "वीर"
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बाल कविता
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समीक्षक

समीक्षक
किसी एक ग्रुप में एक छोटी सी रचना पर बहुत सारी आलोचनात्मक टिप्पणीयों को पढने के बाद बैठे बैठे जो लिख गया प्रस्तुत है :
रचनाकार का अनुरोध
रचना पर टिप्पणी दो
चाहे नकारात्मक हो
रचनाकार का अनुरोध
हमको भा गया
हमारे भीतर छिपे
समीक्षक को जगा गाया
मेरे भीतर
कब से छिपा
समीक्षक जाग गया
और एक छोटी सी रचना पर
विराट समीक्षा दाग गया
रचना पर समीक्षा
विराट रुप पा गई
और समी़क्षा के भीतर
रचना समा गई
बिखर गई
टूट गई
कहीं खो गई
रचना से रोचक
समीक्षा हो गई
और मूल रचना
अपना अर्थ खो गई
अर्थहीन हो गई.......
- वीरेश अरोड़ा "वीर"
किसी एक ग्रुप में एक छोटी सी रचना पर बहुत सारी आलोचनात्मक टिप्पणीयों को पढने के बाद बैठे बैठे जो लिख गया प्रस्तुत है :
रचनाकार का अनुरोध
रचना पर टिप्पणी दो
चाहे नकारात्मक हो
रचनाकार का अनुरोध
हमको भा गया
हमारे भीतर छिपे
समीक्षक को जगा गाया
मेरे भीतर
कब से छिपा
समीक्षक जाग गया
और एक छोटी सी रचना पर
विराट समीक्षा दाग गया
रचना पर समीक्षा
विराट रुप पा गई
और समी़क्षा के भीतर
रचना समा गई
बिखर गई
टूट गई
कहीं खो गई
रचना से रोचक
समीक्षा हो गई
और मूल रचना
अपना अर्थ खो गई
अर्थहीन हो गई.......
- वीरेश अरोड़ा "वीर"
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याद

याद
जब तेरी याद आती है
याद आता है
तेरा मुस्कुराना,
मंद मंद हँसना
वो तेरा लजाना
और धीरे से तेरा
बल खाके गुजर जाना,
तेरी हर बात आँखों में घूम जाती है
जब तेरी याद आती है ....
याद आता है बहुत
वो तेरा मिलना
मेरा हाथ थामे
तेरा साथ चलना
वो तेरी चुनरी का लहराना
हवा से
बालों का बिखर जाना,
तेरे बदन की वो खुशबू
आज भी आ जाती है
जब तेरी याद आती है ....
जब तेरी याद आती है
याद आता है
तेरा मुस्कुराना,
मंद मंद हँसना
वो तेरा लजाना
और धीरे से तेरा
बल खाके गुजर जाना,
तेरी हर बात आँखों में घूम जाती है
जब तेरी याद आती है ....
याद आता है बहुत
वो तेरा मिलना
मेरा हाथ थामे
तेरा साथ चलना
वो तेरी चुनरी का लहराना
हवा से
बालों का बिखर जाना,
तेरे बदन की वो खुशबू
आज भी आ जाती है
जब तेरी याद आती है ....
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राष्ट्र की सेवा समर्पण के साथ करने के बाद, वीरेश अब अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और ज्ञान को लिखित शब्दों में लाते हैं। ऐसी कथाओं की अपेक्षा करें जो प्रेरित करती हैं, ऐसे छंद जो गूंजते हैं, और ऐसे विचार जो उत्थान करते हैं। चाहे आप आत्मनिरीक्षण का एक क्षण, प्रेरणा की चिंगारी, या बस एक आनंददायक पाठ चाहते हों, यह ब्लॉग ईमानदारी और जुनून के साथ तैयार किया गया एक विविध संग्रह प्रदान करता है। इस साहित्यिक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें, जहां अनुभव की ताकत अभिव्यक्ति की सुंदरता के साथ सहज रूप से मिश्रित होती है।
"रिश्ता/सम्बंध" पर मेरे कुछ हाइकु
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हाइकु
निश्चित रूप से, यह रहा हिंदी में:
विश्राम प्राप्त केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के इंस्पेक्टर और जीवन भर के कहानीकार, वीरेश अरोड़ा के रचनात्मक स्थान में आपका स्वागत है। यह ब्लॉग एक कैनवास है जहां अनुभव कल्पना से मिलते हैं, जो आपके लिए प्रेरित "कहानियों", दिल से "कविताओं", भावपूर्ण "ग़ज़लों" और विनोदी "हिकुड" (छोटे, हास्यप्रद छंद) की एक समृद्ध टेपेस्ट्री लेकर आता है।
राष्ट्र की सेवा समर्पण के साथ करने के बाद, वीरेश अब अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और ज्ञान को लिखित शब्दों में लाते हैं। ऐसी कथाओं की अपेक्षा करें जो प्रेरित करती हैं, ऐसे छंद जो गूंजते हैं, और ऐसे विचार जो उत्थान करते हैं। चाहे आप आत्मनिरीक्षण का एक क्षण, प्रेरणा की चिंगारी, या बस एक आनंददायक पाठ चाहते हों, यह ब्लॉग ईमानदारी और जुनून के साथ तैयार किया गया एक विविध संग्रह प्रदान करता है। इस साहित्यिक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें, जहां अनुभव की ताकत अभिव्यक्ति की सुंदरता के साथ सहज रूप से मिश्रित होती है।
- रीत -
- रीत -
रीत है प्यारे
पके आम पे सब
पत्थर मारे
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हाइकु
निश्चित रूप से, यह रहा हिंदी में:
विश्राम प्राप्त केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के इंस्पेक्टर और जीवन भर के कहानीकार, वीरेश अरोड़ा के रचनात्मक स्थान में आपका स्वागत है। यह ब्लॉग एक कैनवास है जहां अनुभव कल्पना से मिलते हैं, जो आपके लिए प्रेरित "कहानियों", दिल से "कविताओं", भावपूर्ण "ग़ज़लों" और विनोदी "हिकुड" (छोटे, हास्यप्रद छंद) की एक समृद्ध टेपेस्ट्री लेकर आता है।
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नज़र आने लगा
जब दोस्तों के दिल मे ज्यादा छल नज़र आने लगा
तब दुश्मनो के दल मे ज़्यादा बल नज़र आने लगा I
देख कर बिगड़ी हुई हालत हमारे देश की
आज मुझको आने वाला कल नज़र आने लगा I
आज मुझको आने वाला कल नज़र आने लगा I
जैसे तैसे अब तलक तो खैच ली ये जिन्दगी
हो सकेगा अब गुजर मुश्किल नज़र आने लगा I
बन रही बिल्डिंग कई फिर बन रहा है एक शहर
फिर मुझे कटता हुआ जंगल नज़र आने लगा I
प्यार से रहने की उसने बात की जब भी अगर
आज के लोगो को वो पागल नज़र आने लगा I
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गीतिका
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चाहता हूँ मैं
ना जाने क्या अब और, करना चाहता हूँ मैं,
जीना अब और नहीं, मरना चाहता हूँ मैं .
मर मर कर जीने से, क्या हांसिल होना है,
जी जी कर रोज़ नहीं, मरना चाहता हूँ मैं.
जीते जी खौफ रहा, मर जाने का मुझको,
मरने से अब और नहीं, डरना चाहता हूँ मैं .
हर रोज़ खुदा से मैंने, माँगा है कुछ ना कुछ,
कर्जा अब और नहीं, करना चाहता हूँ मैं .
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गीतिका
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राष्ट्र की सेवा समर्पण के साथ करने के बाद, वीरेश अब अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और ज्ञान को लिखित शब्दों में लाते हैं। ऐसी कथाओं की अपेक्षा करें जो प्रेरित करती हैं, ऐसे छंद जो गूंजते हैं, और ऐसे विचार जो उत्थान करते हैं। चाहे आप आत्मनिरीक्षण का एक क्षण, प्रेरणा की चिंगारी, या बस एक आनंददायक पाठ चाहते हों, यह ब्लॉग ईमानदारी और जुनून के साथ तैयार किया गया एक विविध संग्रह प्रदान करता है। इस साहित्यिक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें, जहां अनुभव की ताकत अभिव्यक्ति की सुंदरता के साथ सहज रूप से मिश्रित होती है।
सह गए
गज़ल
गम जुदाई का तो हँसकर सह गए
सामने आये तो आँसू बह गए
राजेगम दिल में रखेंगे सोचा था
अश्क आँखों के मगर सब कह गए
देखकर पहचानने की कोशिशें
उनके दिल की बात हमसे कह गए
मुद्दतों से इंतजार उनका किया
क्यों किया अब सोचते ही रह गए
ख्वाब देखे थे बहुत तन्हाई में
मिट्टी के घर की तरह सब ढेह गए
- वीरेश अरोड़ा "वीर"
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गीतिका
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राष्ट्र की सेवा समर्पण के साथ करने के बाद, वीरेश अब अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और ज्ञान को लिखित शब्दों में लाते हैं। ऐसी कथाओं की अपेक्षा करें जो प्रेरित करती हैं, ऐसे छंद जो गूंजते हैं, और ऐसे विचार जो उत्थान करते हैं। चाहे आप आत्मनिरीक्षण का एक क्षण, प्रेरणा की चिंगारी, या बस एक आनंददायक पाठ चाहते हों, यह ब्लॉग ईमानदारी और जुनून के साथ तैयार किया गया एक विविध संग्रह प्रदान करता है। इस साहित्यिक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें, जहां अनुभव की ताकत अभिव्यक्ति की सुंदरता के साथ सहज रूप से मिश्रित होती है।
Tuesday, 20 May 2014
सर्दी - बाल कविता
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बाल कविता
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